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बेदम शाह वारसी

1876 - 1936 | बाराबंकी, भारत

सूफ़ी शायर धार्मिक शायरी के लिए विख्यात

सूफ़ी शायर धार्मिक शायरी के लिए विख्यात

ग़ज़ल 47

शेर 17

हमारी ज़िंदगी तो मुख़्तसर सी इक कहानी थी

भला हो मौत का जिस ने बना रक्खा है अफ़्साना

सब ने ग़ुर्बत में मुझ को छोड़ दिया

इक मिरी बेकसी नहीं जाती

अपना तो ये मज़हब है काबा हो कि बुत-ख़ाना

जिस जा तुम्हें देखेंगे हम सर को झुका देंगे

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पुस्तकें 6

दीवान-ए-बेदम

 

1935

Deewan-e-Bedam

Karishma-e-Warsi

 

जिगर पारा

अरमुग़ान-ए-बेदम

1990

Noor-ul-Aain

Mushaf-e-Bedam

1936

Noor-ul-Ain Mushaf-e-Bedam

Mushaf-e-Bedam

1936

फूलों की चादर

Riyaz-e-Muattar

1991

 

वीडियो 7

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