Davarka Das Shola's Photo'

द्वारका दास शोला

1910 | दिल्ली, भारत

पुस्तकें 4

Mera Malik Ram

 

 

Mere Murshid

 

1970

Shola-e-Zar

 

1962

शोला-ज़ार

 

1962

 

चित्र शायरी 1

अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद वो हँस के ज़रा बोले तो कुछ भी न रहा याद क्या लुत्फ़ उठाएगा जहान-ए-गुज़राँ का वो शख़्स कि जिस शख़्स को रहती हो क़ज़ा याद हम काग उड़ा देते हैं बोतल का उसी वक़्त गर्मी में भी आ जाती है जब काली घटा याद महशर में भी हम तेरी शिकायत न करेंगे आ जाएगी उस दिन भी हमें शर्त-ए-वफ़ा याद पी ली तो ख़ुदा एक तमाशा नज़र आया आया भी तो आया हमें किस वक़्त ख़ुदा याद अल्लाह तिरा शुक्र कि उम्मीद-ए-करम है अल्लाह तिरा शुक्र कि उस ने भी किया याद कल तक तिरे बाइ'स मैं उसे भूला हुआ था क्यूँ आने लगा फिर से मुझे आज ख़ुदा याद

 

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