ग़ज़ल 28

नज़्म 3

 

शेर 25

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई था अगर

फिर ये हंगामा मुलाक़ात से पहले क्या था

मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलट

तज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच

धूप जवानी का याराना अपनी जगह

थक जाता है जिस्म तो साया माँगता है

ई-पुस्तक 2

Dhundli Tasveer

 

1993

गुमाँ आबाद

 

2013

 

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