Jamuna Parsad Rahi's Photo'

जमुना प्रसाद राही

अलीगढ़, भारत

ग़ज़ल 13

शेर 13

कश्तियाँ डूब रही हैं कोई साहिल लाओ

अपनी आँखें मिरी आँखों के मुक़ाबिल लाओ

जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है

हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं

गाँव से गुज़रेगा और मिट्टी के घर ले जाएगा

एक दिन दरिया सभी दीवार दर ले जाएगा

पुस्तकें 2

Bazgasht-e-Ghalib

 

2016

Safarguzar

 

2012

 

ऑडियो 11

कुछ तो सच्चाई के शहकार नज़र में आते

कश्तियाँ डूब रही हैं कोई साहिल लाओ

कोहसार-ए-तग़ाफ़ुल को सदा काट रही है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"अलीगढ़" के और शायर

  • शहरयार शहरयार
  • असअ'द बदायुनी असअ'द बदायुनी
  • ख़लील-उर-रहमान आज़मी ख़लील-उर-रहमान आज़मी
  • आशुफ़्ता चंगेज़ी आशुफ़्ता चंगेज़ी
  • मुईन अहसन जज़्बी मुईन अहसन जज़्बी
  • राहत हसन राहत हसन
  • आल-ए-अहमद सूरूर आल-ए-अहमद सूरूर
  • अख़्तर अंसारी अख़्तर अंसारी
  • वहीद अख़्तर वहीद अख़्तर
  • अहसन मारहरवी अहसन मारहरवी