ग़ज़ल 15

शेर 7

कल तिरे एहसास की बारिश तले

मेरा सूना-पन नहाया देर तक

ज़ख़्म भी अब हसीन लगते हैं

तेरे हाथों फ़रेब खाने पर

मिरी प्यास का तराना यूँ समझ सकेगा

मुझे आज सुन के देखो मिरी ख़ामोशी से आगे

"दिल्ली" के और शायर

  • मीर तक़ी मीर मीर तक़ी मीर
  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • हसरत मोहानी हसरत मोहानी
  • बेख़ुद देहलवी बेख़ुद देहलवी
  • आबरू शाह मुबारक आबरू शाह मुबारक
  • शाह नसीर शाह नसीर
  • ताबाँ अब्दुल हई ताबाँ अब्दुल हई
  • मोमिन ख़ाँ मोमिन मोमिन ख़ाँ मोमिन
  • बहादुर शाह ज़फ़र बहादुर शाह ज़फ़र
  • बलराज कोमल बलराज कोमल