राजनीति और राजनेताओं के बारे में मंटो के प्रसिद्ध उद्धरण

मंटो ने अपनी तहरीरों में समाज के हर उस रवैय्ये, हर उस रुख़ और हर उस पहलू की आलोचना की है जिसकी मौजूदगी समाजी ढाँचे को कमज़ोर करने के मुतरादिफ़ है। वो चाहे धार्मिक अतिवाद हो, बूर्जुआ तबक़े के अत्वार हों, नाम-निहाद तहज़ीब का बोझ हो या फिर सियासत और सयासी लीडरान हों। राह से भटकी हुई राजनीति और राजनेताओं पर मंटो की ये उद्धरण पढ़ कर आप मंटो की इस रविश का अंदाज़ा लगा सकते हैं।