बुला रहा है मुझे आसमाँ तुम्हारी तरफ़

ख़लील मामून

बुला रहा है मुझे आसमाँ तुम्हारी तरफ़

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    बुला रहा है मुझे आसमाँ तुम्हारी तरफ़

    जला के निकला हूँ सब आशियाँ तुम्हारी तरफ़

    मैं जानता हूँ कि सारे जहाँ हैं ख़त्म यहाँ

    मुझे मिलेगा कोई जहाँ तुम्हारी तरफ़

    ख़मोशियों का बस इक सिलसिला है दूर तलक

    कोई लफ़्ज़ कोई ज़बाँ तुम्हारी तरफ़

    हर एक जीता है वुसअत में काएनातों के

    कोई बनाता नहीं है मकाँ तुम्हारी तरफ़

    मरे होऊँ को कोई मारे किस तरह आख़िर

    कोई तीर कोई सिनाँ तुम्हारी तरफ़

    कोई दरिया पर्बत आशियाँ शजर

    ज़मीं है कोई ही आसमाँ तुम्हारी तरफ़

    ज़ुहूर-ए-इश्क़ की दुनिया को छोड़ आया हूँ

    मैं ख़ुद को करता हूँ सब से निहाँ तुम्हारी तरफ़

    मैं मंज़िलों से बहुत दूर गया 'मामून'

    सफ़र ने खो दिए सारे निशाँ तुम्हारी तरफ़

    स्रोत
    • पुस्तक : Sanson Ke Paar (पृष्ठ 320)
    • रचनाकार : Khalil Mamoon
    • प्रकाशन : Educational Publishing House, Delhi (2015)
    • संस्करण : 2015

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