फ़ित्ने अजब तरह के समन-ज़ार से उठे

अकबर हैदराबादी

फ़ित्ने अजब तरह के समन-ज़ार से उठे

अकबर हैदराबादी

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    फ़ित्ने अजब तरह के समन-ज़ार से उठे

    सारे परिंद शाख़-ए-समर-दार से उठे

    दीवार ने क़ुबूल किया सैल-ए-नूर को

    साए तमाम-तर पस-ए-दीवार से उठे

    जिन की नुमू में थी मुआविन हवा कोई

    ऐसे भी गुल ज़मीन-ए-ख़ास-ओ-ख़ार से उठे

    तस्लीम की सिरिश्त बस ईजाब और क़ुबूल

    सारे सवाल जुरअत-ए-इंकार से उठे

    शहर-ए-तअल्लुक़ात में उड़ती है जिन से ख़ाक

    फ़ित्ने वो सब रऊनत-ए-पिंदार से उठे

    आँखों को देखने का सलीक़ा जब गया

    कितने नक़ाब चेहरा-ए-असरार से उठे

    तस्वीर-ए-गर्द बन गया 'अकबर' चमन तमाम

    कैसे ग़ुबार वादी-ए-कोहसार से उठे

    RECITATIONS

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    फ़ित्ने अजब तरह के समन-ज़ार से उठे नोमान शौक़

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