दोगुना

सूफ़ी तबस्सुम

रिपिन प्रिंटिंग प्रेस,लाहोर
1975 | अन्य
  • उप शीर्षक

    अमीर ख़ुसरो की सौ ग़ज़लो का उर्दू ग़ज़ल में तरजुमा

  • सहयोगी

    अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द), देहली

  • श्रेणियाँ

    शाइरी, सूफ़ीवाद / रहस्यवाद

  • पृष्ठ

    213

लेखक: परिचय

सूफ़ी तबस्सुम

ग़ुलाम मुस्तफ़ा सूफ़ीतबस्सुम की गिनती हल्क़ाए अरबाबे ज़ौक़ के प्रतिनिधि शाइरों में होता है. 4 अगस्त 1899 को अमृतसर में पैदा हुए. लाहौर के फोरमेन क्रिस्चियन कालेज फ़ारसी साहित्य में एम.ए.किया और गवर्नमेंट कालेज लाहौर में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ देनेलगे. फ़ारसी विभाग के विभागाध्य्क्ष के पद से सेवानिवृत हुए.
सूफ़ीतबस्सुम उर्दू के साथ साथ फ़ारसी में भी शाइ’री करते थे. उन्होंने ग़ालिब और अमीर ख़ुसरो की फ़ारसी शाइरी का उर्दू में अनुवाद भी किया. इसके अलावा उर्दू व फ़ारसी शाइरी के पंजाबी में भी बहुत से अनुवाद किये. सूफ़ीतबस्सुम को उनके अदबी ख़िदमात के लिए 1944 में हुकूमत ईरान ने ‘तम्गये निशाने सिपास’ से नवाज़ा और हुकूमत पाकिस्तान ने सितारा-ए-इम्तियाज़ से.
1978 में सूफ़ीतबस्सुम का देहांत हुआ.

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