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वज़ीर अली सबा लखनवी

मत्बा नामी ग्रामी,लखनऊ
1847 | अन्य

लेखक: परिचय

वज़ीर अली सबा लखनवी

वज़ीर अली सबा लखनवी

सबा, मीर वज़ीर अली

(1795-1885)

लखनवी शाइरी की तीसरी पीढ़ी के प्रमुख प्रतिनिधि शाइर। ख़्वाजा आतिशके लाइक़ शागिर्द थे। अफ़ीम का शौक़ था, ख़ुद खाते और मेहमानों को खिलाते। वाजिद अली शाह ने दो सौ रुपए माहवार वज़ीफ़ा बाँध रखा था, जिससे ऐश में गुज़रती थी।

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