aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब डॉक्टर नासिर अब्बास नय्यर के तनक़ीदी मज़ामीन का मजमूआ है जो आलमगीरियत, लिस्सानियात, अदब और समाजी तबदीली जैसे मौज़ूआत पर मुहीत है। इसमें उर्दू ज़बान-ओ-अदब के मुस्तक़बिल, बर्रे-सग़ीर में उसकी सूरत-ए-हाल, दानिश्वराना मुबाहिस, अदबी थिअरी, और मुमताज़ उर्दू अदीबों जैसे मंटो, इंतज़ार हुसैन और बलराज मेनरा के काम पर तज्ज़िए शामिल हैं। मुसन्निफ़ ने पेश लफ़्ज़ में एक नई किताब के किरदार पर ज़ोर दिया है कि वह सोच को चैलेन्ज करे और नई ज़ेहनी दुनियाओं को जन्म दे।