aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब क़ाइद-ए-मिल्लत नवाब बहादुर यार जंग की सवानिह उमरी है, जो नई नस्ल के लिए आसान और मुख़्तसर अंदाज़ में उनकी शख़्सियत, तक़रीर और ख़िदमात को उजागर करती है। डॉक्टर अख़्तर सुल्ताना ने इसे अपनी मरहूमा बहन सालेहा अल्ताफ़ की ख़्वाहिश पर तहरीर किया है।