aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब अफ़ग़ान अल्लाह ख़ान की हयात और अदबी ख़िदमात पर एक इल्मी व तनक़ीदी मुताला है। इसमें उनकी इल्मी व अदबी जहतों, तहक़ीक़ी तरीक़ा कार और बहैसियत नक़्क़ाद उनके किरदार का गहराई से जायज़ा लिया गया है, बालख़ुसूस फ़िराक़ गोरखपुरी की शाइरी पर उनके तजज़िए पर ज़ोर दिया गया है।