लेखक : गोपी चंद नारंग

प्रकाशक : नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली

प्रकाशन वर्ष : 1976

भाषा : Urdu

श्रेणियाँ : मिथक

पृष्ठ : 150

सहयोगी : गोपी चंद नारंग

पुराणों की कहानियाँ

पुस्तक: परिचय

تاریخی اعتبار سے پران ہندو مذہب کے ارتقا کی اس منزل کی ترجمانی کرتے ہیں جب بدھ مت سے مقابلے کے لیے ہندو مذہب تجدید اور احیاء کے دور سے گزر رہا تھا۔پرانوں کی کہانیوں میں برہما، وشنو، شِو ،پاروتی،اُما،درگا لکشمی اور دیوی دیوتاؤں اور، رشیوں منیوں کے سینکڑوں کردار رو نما ہوتے ہیں "پُرانوں کی کہانیاں" گوپی چند نارنگ کی تصنیف ہے ۔یہ کتاب 1976 میں نیشنل بک ٹرسٹ انڈیا، نئی دلی نے شائع کی۔ اس میں کل بائیس کہانیاں ہیں۔ پُران بقول پروفیسر گوپی چند نارنگ ’’ ہندستانی دیو مالا اور اساطیر کے قدیم ترین مجموعے ہیں۔ ہندستانی ذہن و مزاج کی آریائی اور دراوڑی تمدن اور نظریات کے ادغام کی اور قدیم ترین قبل تاریخ زمانے کی جیسی ترجمانی پرانوں کے ذریعے سے ہوتی ہے، کسی اور ذریعے سے ممکن نہیں"۔

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लेखक: परिचय

गोपी चंद नारंग उर्दू के एक बड़े आलोचक,विचारक और भाषाविद हैं। एक अदीब, नक़्क़ाद, स्कालर और प्रोफ़ेसर के रूप में वो हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों मुल्कों में समान रूप से लोकप्रिय हैं। गोपी चंद नारंग के नाम यह अनोखा रिकॉर्ड है कि उन्हें पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से प्रसिद्ध नागरिक सम्मान सितारा ए इम्तियाज़ और भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण और पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाज़ा गया है। उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें और भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया है। जिनमें इटली का मिज़ीनी गोल्ड मेडल, शिकागो का अमीर खुसरो अवार्ड, ग़ालिब अवार्ड, कैनेडियन एकेडमी ऑफ उर्दू लैंग्वेज एंड लिटरेचर अवार्ड और यूरोपीय उर्दू राइटर्स अवार्ड शामिल हैं। वह साहित्य अकादेमी के प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी सम्मानित थे तथा साहित्य अकादेमी के फ़ेलो थे।
नारंग ने उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में भी किताबें लिखी हैं। उनकी गिनती उर्दू के प्रबल समर्थकों में की जाती है। वो इस हक़ीक़त पर अफ़सोस करते हैं कि उर्दू ज़बान सियासत का शिकार रही है। उनका मानना है कि उर्दू की जड़ें हिंदुस्तान में हैं और हिंदी दर असल उर्दू ज़बान की बहन है।

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