aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब यूनानी चिकित्सा में कुश्ता जात (भस्म या कल्किन दवाएं) पर एक व्यापक संकलन है जो हकीम अजमल ख़ान के रिसाला 'तुहफ़ा-ए-हामिदिया' पर आधारित है। इसमें कुश्ता जात के सिद्धांत, तैयारी के तरीके, लाभ और विभिन्न रोगों में उनके उपयोग के निर्देश शामिल हैं।
शैदा, हकीम मोहम्मद अजमल खाँ (1868-1927) देहली के मशहूर कहीम जिन्हें ‘मसीहुल्मुल्क’ कहा जाता था। आज़ादी की लड़ाई के बड़े नेताओं में शुमार होते थे। नवाब रामपुर के ख़ास तबीब थे और वही संदिग्ध हालात में मौत हुई। कहा जाता है कि उन्हें जह्र दिया गया था।