Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

लेखक : मोहम्मदी बेगम

प्रकाशक : दारुल इशाअत पंजाब, लाहौर

प्रकाशन वर्ष : 1918

भाषा : उर्दू

श्रेणियाँ : बाल-साहित्य

उप श्रेणियां : कहानियाँ

पृष्ठ : 94

सहयोगी : मोहम्मद मूसा

Sughad Beti
For any query/comment related to this ebook, please contact us at haidar.ali@rekhta.org

लेखक: परिचय

मुहम्मदी बेगम एक लेखिका थीं और भारत में महिलाओं के पहले उर्दू साप्ताहिक “तहज़ीब-ए-निस्वां” की संपादक थीं। वे महिलाओं की शिक्षा और जागरूकता की प्रारंभिक अग्रदूतों में शामिल थीं। वे दिल्ली के सैयद अहमद शफी की पुत्री थीं, जो दिल्ली में एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर थे। उनके माता-पिता प्रगतिशील विचारों के थे और अत्यंत परंपरावादी दौर में भी उन्होंने अपनी प्रतिभाशाली बेटी को शिक्षा और संस्कारों से समृद्ध किया। मुहम्मदी बेगम बचपन से ही नेक स्वभाव, अच्छे संस्कार, तेज बुद्धि और मजबूत स्मरण शक्ति की धनी थीं। उन्होंने बहुत कम उम्र में पढ़ने-लिखने, सिलाई-बुनाई और खाना बनाने में दक्षता हासिल कर ली थी।

उनका विवाह 19 वर्ष की आयु में मौलवी सैयद मुमताज़ अली से हुआ, जो महिला शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने लाहौर में रफ़ाह-ए-आम प्रेस और दारुल-इशाअत पंजाब की स्थापना की थी और उन्हें “शम्स-उल-उलमा” की उपाधि भी मिली थी। मुहम्मदी बेगम ने उनकी पहली पत्नी से हुए बच्चों को सच्चे मातृत्व का प्यार, स्नेह और देखभाल दी। उन्होंने घर की पूरी जिम्मेदारी संभाली और जब मौलवी मुमताज़ अली ने महिलाओं में जागरूकता का आंदोलन शुरू करने का निश्चय किया, तो वे इस मिशन में भी उनके साथ पूरी तरह सक्रिय रहीं।

मौलवी मुमताज़ अली ने अपनी पत्नी की क्षमताओं को देखते हुए लाहौर से महिलाओं के लिए एक समाचारपत्र शुरू करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने मुहम्मदी बेगम की आवश्यक शिक्षा का प्रबंध किया। उनके लिए कई ट्यूटर रखे गए—एक अंग्रेज़ महिला उन्हें अंग्रेज़ी सिखाती थीं, एक हिंदू महिला उन्हें हिंदी पढ़ाती थीं, एक लड़का उन्हें गणित सिखाता था, और स्वयं मुमताज़ अली उन्हें एक दिन अरबी और एक दिन फ़ारसी पढ़ाते थे। इस प्रकार वे महिलाओं के अख़बार की संपादक बनने के योग्य हो गईं।

1898 में मौलवी मुमताज़ अली ने उनकी संपादकता में “तहज़ीब-ए-निस्वां” नाम से अख़बार जारी किया। मुहम्मदी बेगम ने लड़कियों की शिक्षा और नैतिक प्रशिक्षण के उद्देश्य से अनेक पुस्तकें लिखीं। अपने इकलौते बेटे इम्तियाज़ अली ताज के लिए उन्होंने उसके बचपन में “ताज गीत” (बाल कविताएँ) और “इम्तियाज़ पचीसी” (कहानियाँ) जैसी पुस्तकें लिखीं, जो अत्यंत लोकप्रिय हुईं। उनकी अन्य रचनाओं में “ख़ानादारी”, “आदाब-ए-मुलाक़ात”, “नेमत ख़ाना”, “रफ़ीक़-ए-अरूस”, “ख़्वाब-ए-राहत”, “हयात-ए-अशरफ़”, “सुघड़ बेटी”, “शरीफ़ बेटी”, “चंदन हार”, “आज कल”, “सफ़िया बेगम”, “सच्चे मोती”, “अनमोल मोती”, “आरसी”, “ताज फूल” आदि शामिल हैं।

.....और पढ़िए
For any query/comment related to this ebook, please contact us at haidar.ali@rekhta.org

लेखक की अन्य पुस्तकें

लेखक की अन्य पुस्तकें यहाँ पढ़ें।

पूरा देखिए

लोकप्रिय और ट्रेंडिंग

सबसे लोकप्रिय और ट्रेंडिंग उर्दू पुस्तकों का पता लगाएँ।

पूरा देखिए
बोलिए