aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब मुहम्मद नूरुद्दीन खान के मज़ामीन और याददाश्तों का मजमुआ है। मुसन्निफ ने इन मज़ामीन को महफूज़ रखने की नीयत से जमा किया है, जिनमें से कुछ उनकी अपनी तहकीक पर मबनी तहरीरें हैं। किताब में हैदराबाद दक्कन में ओहदे उस्मानी के दौरान रमज़ान की रिवायत, अदबी महफ़िलों (तरही मुशायरों) की तारीखी झलकियां, रहीम साब मियां और लेफ्टिनेंट कर्नल डॉक्टर अशरफ़ुल हक़ देहलवी जैसी शख्सियात की सवानिही खाके, और उर्दू शायरी में हज़ल गोई की रिवायत का जायज़ा लिया गया है। इसमें सीनियर सहाफियों से हासिलशुदा ज़ाती मुशाहदात और किस्से भी शामिल हैं, जो हैदराबादी सफ़त और अदबी शख्सियात के भुलाए गए पहलुओं पर रौशनी डालते हैं।