जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

वली मोहम्मद वली

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    जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे

    उसे ज़िंदगी क्यूँ भारी लगे

    छोड़े मोहब्बत दम-ए-मर्ग तक

    जिसे यार-ए-जानी सूँ यारी लगे

    होवे उसे जग में हरगिज़ क़रार

    जिसे इश्क़ की बे-क़रारी लगे

    हर इक वक़्त मुझ आशिक़-ए-पाक कूँ

    प्यारे तिरी बात प्यारी लगे

    'वली' कूँ कहे तू अगर यक बचन

    रक़ीबाँ के दिल में कटारी लगे

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    मलिका पुखराज

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    इक़बाल बानो

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    फ़सीह अकमल

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    जिसे इश्क़ का तीर कारी लगे फ़सीह अकमल

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