मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम

बहादुर शाह ज़फ़र

मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम

बहादुर शाह ज़फ़र

MORE BYबहादुर शाह ज़फ़र

    मर गए वाह उन की नाज़-बरदारी में हम

    दिल के हाथों से पड़े कैसी गिरफ़्तारी में हम

    सब पे रौशन है हमारी सोज़िश-ए-दिल बज़्म में

    शम्अ साँ जलते हैं अपनी गर्म-बाज़ारी में हम

    याद में है तेरे दम की आमद-ओ-शुद पुर-ख़याल

    बे-ख़बर सब से हैं इस दम की ख़बरदारी में हम

    जब हँसाया गर्दिश-ए-गर्दूं ने हम को शक्ल-ए-गुल

    मिस्ल-ए-शबनम हैं हमेशा गिर्या ज़ारी में हम

    चश्म दिल बीना है अपने रोज़ शब मर्दुमाँ

    गरचे सोते हैं ब-ज़ाहिर पर हैं बेदारी में हम

    दोश पर रख़्त-ए-सफ़र बाँधे है क्या ग़ुंचा सबा

    देखते हैं सब को याँ जैसे कि तय्यारी में हम

    कब तलक बे-दीद से या रब रखें चश्म-ए-वफ़ा

    लग रहे हैं आज कल तो दिल की ग़म-ख़्वारी में हम

    देख कर आईना क्या कहता है यारो अब वो शोख़

    माह से सद चंद बेहतर हैं अदा-दारी में हम

    'ज़फ़र' लिख तू ग़ज़ल बहर क़वाफ़ी फेर कर

    ख़ामा-ए-दुर-रेज़ से हैं अब गुहर-बारी में हम

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    मेहरान अमरोही

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    नोमान शौक़

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    मर गए ऐ वाह उन की नाज़-बरदारी में हम नोमान शौक़

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