बिजनौर के शायर और अदीब

कुल: 60

आधुनिक उर्दू नज़्म के संस्थापकों में शामिल। अग्रणी फ़िल्म-संवाद लेखक। फ़िल्म ' वक़्त ' और ' क़ानून ' के संवादों के लिए मशहूर। फ़िल्म 'वक़्त' में उनका संवाद ' जिनके घर शीशे के हों वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते ' , आज भी ज़बानों पर

उर्दू के पहले उपन्यासकार के रूप में विख्यात

बीसवीं सदी के नामचीन हिंदी शायर और कथाकार, अपनी लोकप्रिय नज़्मों के साथ हिंदी में ग़ज़ल लेखन के लिए पहचाने जाते हैं

हम्द और ना’त के अहम शायर

मुशायरों में लोकप्रिय, प्रसिद्ध कवयित्री

पत्रकार और शायर, हास्य-व्यंग्य की शायरी भी की

पारंपरिक ढंग के शायर, मुशायरों में लोकप्रिय रहे