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उत्तर प्रदेश के शायर और अदीब

कुल: 505

लखनऊ के सबसे गर्म मिज़ाज शायर। मीर तक़ी मीर के समकालीन। मुसहफ़ी के साथ प्रतिद्वंदिता के लिए मशहूर। 'रेख़्ती' विधा की शायरी भी की और गद्द में रानी केतकी की कहानी लिखी

लखनऊ के अग्रणी क्लासिकी शाइरों में विख्यात/मर्सिया के महान शाइर

प्रमुख मर्सिया-निगार, मसनवी ‘सहर-उल-बयान’ के लिए विख्यात

उर्दू के पहले बड़े शायर जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है

18वी सदी के बड़े शायरों में शामिल। मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन

18वीं सदी के बड़े शायरों में शामिल, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन। अग्रणी शायर जिन्होंने भारतीय संस्कृति और त्योहारों पर नज्में लिखीं। होली, दीवाली, श्रीकृष्ण पर नज़्मों के लिए मशहूर

18वी सदी के अग्रणी शायर, मीर तक़ी 'मीर' के समकालीन।

शायर, कथाकार और श्रेष्ठ उर्दू समीक्षक

बीसवीं सदी के महत्वपूर्ण विद्वान,लेखक, अनुवादक,उपन्यासकार, नाटककार. लखनऊ की सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन के मर्मज्ञ.

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

मुमताज़ शाइर, विख्यात संस्कृत विद्वान, साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

प्रख्यात उत्तर-आधुनिक शायर, साहित्यिक पत्रिका दायरे के संपादक।

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, अपने सूफ़ियाना लहजे के लिए प्रसिद्ध।

अग्रणी एवं प्रख्यात प्रगतिशील शायर, रोमांटिक और क्रांतिकारी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध, ऑल इंडिया रेडियो की पत्रिका “आवाज” के पहले संपादक, मशहूर शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के मामा

लखनऊ के प्रसिद्ध शायर, मिर्ज़ा दबीर के सुपुत्र, काव्य विद्या पर अपनी किताब ‘मिक़यासुल अशआर’ के लिए भी प्रसिद्ध

मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन, 19वीं सदी की उर्दू ग़ज़ल का रौशन सितारा।

स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य। ' इंक़िलाब ज़िन्दाबाद ' का नारा दिया। कृष्ण भक्त , अपनी ग़ज़ल ' चुपके चुपके, रात दिन आँसू बहाना याद है ' के लिए प्रसिद्ध

लखनऊ के मुम्ताज़ और नई राह बनाने वाले शायर/मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन

सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक शायरों में शामिल, अपने नव-क्लासिकी लहजे के लिए विख्यात।

आधुनिक उर्दू नज़्म के निर्माताओं में शामिल और बाल-कविता के लिए प्रसिद्ध

सबसे प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल, इश्क़, तग़ज़्ज़ुल और रूमानियत के बेमिसाल शायर, ‘रईस-उल-मुतग़ज़्ज़िलीन’ के ख़िताब से सम्मानित

अपनी शायरी में महबूब के साथ मामला-बंदी के मज़मून के लिए मशहूर, नौजवानी में नेत्रहीन हो गए

कबीर

1440 - 1518

मध्यकालीन भक्ति-साहित्य की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विद्रोही संत-कवि।

आधुनिक उर्दू आलोचना के संस्थापको में अग्रणी।

19 वीं सदी के शायर

उर्दू के दो बड़े मर्सिया-गो शाइरों में शामिल

प्रसिद्ध क्लासिकी शायर जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया

प्रसिद्ध इतिहासकार, छंदशास्त्र और भाषा-विज्ञान के विशेषज्ञ, अपनी किताब “बहर-उल-फ़साहत” के लिए मशहूर

दबिस्तान-ए-रामपुर के प्रमुख शायर, मिर्ज़ा ग़ालिब ने "मीर-ए-रामपुर" की उपाधि से संबोधित किया

19वीं सदी में लखनऊ के अग्रणी शायरों में से एक, प्रख्यात मसनवी गुलज़ार-ए-नसीम के रचयिता

उर्दू हिंदी के पहले सशक्त फ़िक्शन-निगार, जिन्होंने उपन्यास और कहानी के माध्यम से समाजी सरोकारों को कलात्मक अभिव्यक्ति दी। उपन्यास-सम्राट के रूप में सर्वविदित।

एक विशिष्ट शैली के कथाकार، पत्रकार और 'लैला के खतूत' एवं 'मजनूं की डायरी' के लेखक

शोधकर्ता, उर्दू वर्तनी और व्याकरण तथा शास्त्रीय ग्रंथों के संपादन के लिए प्रसिद्ध

शराब पर शायरी के लिए प्रसिध्द , जब कि कहा जाता है कि उन्हों ने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

लब्धप्रतिष्ठ विचारक, शोधकर्ता और शिक्षाविद। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक

दबिस्तान-ए-लखनऊ के नुमाइंदा शाइरों में शुमार, आतिश के शागिर्द

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर जिन्होंने नई ग़ज़ल के लिए राह बनाई/मिर्ज़ा ग़ालिब के विरोध के लिए प्रसिद्ध

सूफ़ियाना विचारधारा के लोकप्रिय शायर

लखनऊ के लोकप्रिय शायर और विद्वान, दाग़ और नातिक़ गुलावठी के शागिर्द. ग़ालिब और हाफ़िज़ के कलम की व्याख्यान की और अनुवाद किया. इसके अलावा उर्दू की क़दीम शायरात (प्राचीन कवयित्रियों) का तज़्किरा भी सम्पादित किया

एक प्रख्यात इस्लामी विद्वान, अद्वितीय साहित्यकार, मरसिया लेखक, आत्मकथा लेखक, महान स्तंभकार, पत्रकार और कुरआन के व्याख्याकार।

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