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अलीगढ़ के शायर और अदीब

कुल: 164

प्रख्यात उत्तर-आधुनिक शायर, 1996 में अचानक लापता हो गए।

प्रख्यात उत्तर-आधुनिक शायर, साहित्यिक पत्रिका दायरे के संपादक।

आधुनिक उर्दू आलोचना के संस्थापको में अग्रणी।

अग्रणी आधुनिक उर्दू शायरों में शामिल। फ़िल्म गीतकार , ' फ़िल्म उमराव जान ' , के गीतों के लिए प्रसिद्ध। भारतीय ज्ञान पीठ एवार्ड से सम्मानित

अग्रणी आधुनिक शायरों और आलोचकों में विख्यात।

आधुनिक उर्दू आलोचना के संस्थापकों में शामिल हैं।

व्यंग युक्त भावनात्मक तीक्ष्णता के लिए प्रख्यात

भारतीय इतिहासकार, धार्मिक विद्वान और कूटनीतिज्ञ

अग्रणी उर्दू आलोचकों में से एक।

जदीदियत के बाद की नस्ल के नुमाइंदा तरीन शायरों में शामिल, क्लासिकी तर्ज़-ए-बयान और अस्री हिस्सियत की तख़लीक़ी आमेज़िश के लिए मारूफ़

प्रसिद्ध प्रगतिशील आलोचक, रुमानवी शैली के कहानीकारों में शामिल

प्रमुखतम प्रगतिशील शायरों में विख्यात/ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के समकालीन/अपनी गज़ल ‘मरने की दुआएँ क्यों माँगूँ.......’ के लिए प्रसिद्ध, जिसे कई गायकों ने स्वर दिए हैं

जदीदियत से मुतअस्सिर अहम ग़ज़ल-गो, अपने तख़लीक़ी तर्ज़-ए-बयान के लिए मारूफ़

अग्रणी हिंदी उपन्यासकार और फ़िल्म संवाद-लेखक , टी. वी. सीरियल ' महाभारत ' के संवादों के लिए प्रसिद्ध

अपारंपरिक विचारों के लिए प्रसिद्ध कथाकार और नाटककार. विवादित कहानी संग्रह ‘अंगारे’ में शामिल लेखिका. नारी समस्याओं को बेबाक अंदाज़ में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं.

भारत की अग्रणी शायरात में विख्यात।

अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

मुमताज़ स्काॅलर, अनुवादक और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर और यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र के निदेशक हैं

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अरबी विभाग के प्रोफ़ेसर और पत्रिका तहज़ीब-उल-अख़लाक़ के पूर्व संपादक।

शायर, आलोचक और कथा लेखक, संवेदनशील सामाजिक विषयों पर उपन्यास और कहानी लेखन के लिए मशहूर

नई नस्ल के मुमताज़ शायरों और नक़्क़ादों में शुमार, साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित

प्रख्यात उर्दू लेखक, आलोचक, निबंधकार और इस्लामी विद्वान

नई नस्ल के अहम शायर

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