ज़ैद से ज़ैदी बना और बक्र से बकरी हुआ

ज़फ़र इक़बाल

ज़ैद से ज़ैदी बना और बक्र से बकरी हुआ

ज़फ़र इक़बाल

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    ज़ैद से ज़ैदी बना और बक्र से बकरी हुआ

    सामना बुज़दिल से था मैं इस लिए बकरी हुआ

    यूँ सजा रक्खा था क़ुर्बानी का बकरा शोख़ ने

    दिल हमारा देखते ही देखते बकरी हुआ

    स्रोत:

    • पुस्तक : Muntakhab Shahekar Mazahiya Shayari (पृष्ठ 94)
    • रचनाकार : Roohi Kanjahi
    • प्रकाशन : Alhamd Publications (1992)
    • संस्करण : 1992

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