ऐ चाँद
ऐ चाँद मुझे इतना तो बता
तू ने भी प्रेम किया था क्या
इन सूनी लम्बी रातों में किस की राह तकता रहता है
मन तेरा घायल है इस की पीड़ा चुप-चाप तू सहता है
क्या कारन है नहीं कहता है
तारों ने इशारों से जो कहा
तू ने भी प्रेम किया था क्या
ऐ चाँद मुझे इतना तो बता
दिल की धड़कन की गाथा में मन की तड़पन के अफ़्साने
ये पापी दुनिया क्या समझे ये जग हत्यारा क्या जाने
मैं तू दोनों हैं दीवाने
कुछ मेरी सुन कुछ अपनी सुना
तू ने भी प्रेम किया था क्या
ऐ चाँद मुझे इतना तो बता
जब तेरी रू-पहली नगरी में खिलती है सुनहरी फुलवारी
ऐसे किसी दूध की गंगा में ज्यूँ दीप तरंगें हों जारी
आकाश कमल बारी बारी
कहते हैं किस की बिरह कथा
तू ने भी प्रेम किया था क्या
ऐ चाँद मुझे इतना तो बता
सुन किसी देवगी हृदय की ज्वाला ऐसे बुझ सकती है
नैनों के जल से आहों से ये और भड़कने लगती है
वो कौन है किस में शक्ति है
जल सके न दे जो उसे जला
तू ने भी प्रेम किया था क्या
ऐ चाँद मुझे इतना तो बता
तेरी उजली सी बस्ती में भी शायद ऐसा होता है
तब कपट भरे मन हँसते हैं जब प्रेमी चुपके रोता है
किस लिए नहीं तू सोता है
सब जान लिया तू लाख छुपा
तू ने भी प्रेम किया था क्या
ऐ चाँद मुझे इतना तो बता
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