Aatif Waheed Yasir's Photo'

आतिफ़ वहीद यासिर

1985 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 4

 

शेर 4

इश्क़ जैसे कहीं छूने से भी लग जाता हो

कौन बैठेगा भला आप के बीमार के साथ

रहज़नों के हाथ सारा इंतिज़ाम आया तो क्या

फिर वफ़ा के मुजरिमों में मेरा नाम आया तो क्या

मिरी राख में थीं कहीं कहीं मेरे एक ख़्वाब की किर्चियाँ

मेरे जिस्म-ओ-जाँ में छुपा हुआ तिरी क़ुर्बतों का ख़याल था

"लाहौर" के और शायर

  • आरिफ़ा शहज़ाद आरिफ़ा शहज़ाद
  • फरीहा नक़वी फरीहा नक़वी
  • नाहीद क़ासमी नाहीद क़ासमी
  • एजाज़ फ़ारूक़ी एजाज़ फ़ारूक़ी
  • साइमा इसमा साइमा इसमा
  • हम्माद नियाज़ी हम्माद नियाज़ी
  • आसिमा ताहिर आसिमा ताहिर
  • नदीम भाभा नदीम भाभा
  • वसी शाह वसी शाह
  • अली अकबर नातिक़ अली अकबर नातिक़

Added to your favorites

Removed from your favorites