noImage

अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़

1833 - 1889 | पश्चिम बंगाल, भारत

क्लासिकी शैली और पैटर्न के प्रतिष्ठित शायर,अपनी किताब "सुख़न-ए-शोरा" के लिए मशहूर

क्लासिकी शैली और पैटर्न के प्रतिष्ठित शायर,अपनी किताब "सुख़न-ए-शोरा" के लिए मशहूर

ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़

पर हक़ीक़त में जाँ-फ़ज़ाँ है इश्क़

मस्जिद में गर गुज़र हुआ दैर ही सही

बेकार बैठे क्यूँ रहें इक सैर ही सही

पीरी में शौक़ हौसला-फ़रसा नहीं रहा

वो दिल नहीं रहा वो ज़माना नहीं रहा

उन के दिल की कुदूरत और बढ़ी

ज़िक्र कीजिए अगर सफ़ाई का