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अब्दुल ग़फ़ूर नस्साख़

1833 - 1889 | पश्चिम बंगाल, भारत

क्लासिकी शैली और पैटर्न के प्रतिष्ठित शायर,अपनी किताब "सुख़न-ए-शोरा" के लिए मशहूर

क्लासिकी शैली और पैटर्न के प्रतिष्ठित शायर,अपनी किताब "सुख़न-ए-शोरा" के लिए मशहूर

ग़ज़ल 5

 

शेर 4

ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़

पर हक़ीक़त में जाँ-फ़ज़ाँ है इश्क़

मस्जिद में गर गुज़र हुआ दैर ही सही

बेकार बैठे क्यूँ रहें इक सैर ही सही

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पीरी में शौक़ हौसला-फ़रसा नहीं रहा

वो दिल नहीं रहा वो ज़माना नहीं रहा

उन के दिल की कुदूरत और बढ़ी

ज़िक्र कीजिए अगर सफ़ाई का

पुस्तकें 15

Abdul Ghafoor Nassakh

 

2003

Armughan

 

1886

Bagh-e-Fikr

Muqattaat-e-Nassakh

1887

Bagh-e-Fikr

Muqattaat-e-Nassakh

1977

Khud Nawisht Sawaneh Hayat Nassakh

 

1986

Marghoob Dil

 

1874

Nassakh Se Wahshat Tak

 

1959

Nassakh: Hayat-o-Tasaneef

 

1979

Shahid Ishrat

 

 

Sukhan-e-Shora

 

1982

ऑडियो 3

ज़ाहिरन मौत है क़ज़ा है इश्क़

नक़्श-ए-दिल है सितम जुदाई का

पीरी में शौक़ हौसला-फ़रसा नहीं रहा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

 

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