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आग़ा हश्र काश्मीरी

1879 - 1935 | लाहौर, पाकिस्तान

लोकप्रिय नाटककार और शायर, जिनके लेखन ने उर्दू में नाटक लेखन को एक स्थायी परम्परा के रूप में स्थापित किया

लोकप्रिय नाटककार और शायर, जिनके लेखन ने उर्दू में नाटक लेखन को एक स्थायी परम्परा के रूप में स्थापित किया

ग़ज़ल 5

 

शेर 9

ये खुले खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे

मिरे हाथ से सँवरते तो कुछ और बात होती

याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं

भूलने वाले कभी तुझ को भी याद आता हूँ मैं

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गोया तुम्हारी याद ही मेरा इलाज है

होता है पहरों ज़िक्र तुम्हारा तबीब से

पुस्तकें 40

आग़ा हश्र और उनके ड्रामे

 

1960

Aagha Hashr Kaashmiri

Hayat Aur Karname

1986

Aagha Hashr Kaashmiri

 

 

Aagha Hashr Kaashmiri Aur Urdu Drama

 

1979

Aagha Hashr Kaashmiri Ke Numainda Drame

 

2004

Aagha Hashr Ke Drame

Volume-001

1987

Aagha Hashr Shakhsiyat Aur Fan

 

2005

Aankh Ka Nasha : Aur Dusre Darame

 

1957

Agha Hashr Kashmiri

Aur Un Ke Daramon Ka Tanqeedi Mutala

1988

Agha Hashr Kashmiri

Hayat Aur Drama Nigari

2002

वीडियो 6

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याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं

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याद में तेरी जहाँ को भूलता जाता हूँ मैं

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फ़रीदा ख़ानम

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