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अलीम अख़्तर

1914 - 1972 | मेरठ, भारत

पूर्वाधुनिक शायर, क्लासिकी रंग में ग़ज़लें कहीं. मासिक ‘शमा’ से सम्बद्ध रहे, बच्चों के लिए लिखी गई नज़्मों का एक संग्रह भी प्रकाशित हुआ

पूर्वाधुनिक शायर, क्लासिकी रंग में ग़ज़लें कहीं. मासिक ‘शमा’ से सम्बद्ध रहे, बच्चों के लिए लिखी गई नज़्मों का एक संग्रह भी प्रकाशित हुआ

ग़ज़ल

किसी के वादा-ए-फ़र्दा पर ए'तिबार तो है

नोमान शौक़

तू अगर दिल-नवाज़ हो जाए

नोमान शौक़

दर्द बढ़ कर दवा न हो जाए

नोमान शौक़

दिल को शाइस्ता-ए-एहसास-ए-तमन्ना न करें

नोमान शौक़

निगाह-ए-लुत्फ़ क्या कम हो गई है

नोमान शौक़

मोहब्बत क्या मोहब्बत का सिला क्या

नोमान शौक़

मोहब्बत का रग-ओ-पै में मिरी रूह-ए-रवाँ होना

नोमान शौक़

वो क्या गए पयाम-ए-सफ़र दे गए मुझे

नोमान शौक़

शरीक-ए-हाल-ए-दिल-ए-बे-क़रार आज भी है

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI