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अली अहमद जलीली

1921 - 2005

शायर और आलोचक, जलील मानकपुरी के सुपुत्र

शायर और आलोचक, जलील मानकपुरी के सुपुत्र

ग़ज़ल 13

शेर 15

ग़म से मंसूब करूँ दर्द का रिश्ता दे दूँ

ज़िंदगी तुझे जीने का सलीक़ा दे दूँ

लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे

महसूस हो रही है ख़ुद अपनी कमी मुझे

हम ने देखा है ज़माने का बदलना लेकिन

उन के बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते

रोके से कहीं हादसा-ए-वक़्त रुका है

शोलों से बचा शहर तो शबनम से जला है

क्या इसी वास्ते सींचा था लहू से अपने

जब सँवर जाए चमन आग लगा दी जाए

पुस्तकें 19

Andhere Ujale

 

1981

Butkhana-e-Khaleel

 

1994

Fasahat Jung Jaleel Manakpuri

Hayat Shakhsiyat Fan

1993

Ghalib Ek Mutala

 

1998

Intikhab Kalam-e-Jaleel Manikpuri

 

1985

Kainat-e-Jaleel

 

1985

Kainat-e-Jaleel Manikpuri

 

1999

Lahu Ki Aanch

 

1996

Makateeb-e-Jaleel

 

1982

Manzar Manzar

 

1987

वीडियो 4

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Khushi ne mujhko thukraya

बेगम अख़्तर

अब छलकते हुए साग़र नहीं देखे जाते

बेगम अख़्तर

ख़ुशी ने मुझ को ठुकराया है दर्द-ओ-ग़म ने पाला है

बेगम अख़्तर

ख़ुशी ने मुझ को ठुकराया है दर्द-ओ-ग़म ने पाला है

बेगम अख़्तर

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