aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
noImage

अनंनद राम मुख़लिस

1699 - 1751

अनंनद राम मुख़लिस के शेर

फूल पर गुलशन के गोया दाना-ए-शबनम नहीं

आशिक़ों के हाल पर आँखें फिराती है बहार

धूम आने की ये किस की गुलज़ार में पड़ी है

हाथ अरगजी का पियाला नर्गिस लिए खड़ी है

Recitation

Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

GET YOUR PASS
बोलिए