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अरशद अली ख़ान क़लक़

1820 - 1879 | लखनऊ, भारत

अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के प्रमुख दरबारी और आफ़ताबुद्दौला शम्स-ए-जंग के ख़िताब से सम्मानित शायर

अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के प्रमुख दरबारी और आफ़ताबुद्दौला शम्स-ए-जंग के ख़िताब से सम्मानित शायर

उपनाम : 'क़लक़'

मूल नाम : ख़्वाजा अरशद अ’ली ख़ाँ

आख़िर इंसान हूँ पत्थर का तो रखता नहीं दिल

बुतो इतना सताओ ख़ुदा-रा मुझ को

क़लक़, ख़्वाजा अरशद अली ख़ाँ

(लगभग 1820-1879)

अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के ख़ास मुसाहिब (दरबारी) थे और आफ़्ताबुद्दौला शम्स जंग बहादुरका ख़िताब मिला हुआ था। नवाब को अंग्रेज़ों ने विर्वासित करके कलकत्ता भेजा तो क़लक़भी उनके साथ वहीं चले गए। बाद में रामपुर आ रहे और वहीं देहाँत हुआ।