मुख़ालिफ़ों ने ख़बर जब कोई उड़ा दी है

तो दोस्तों ने उसे और भी हवा दी है

किया था ज़ुल्म तो गुलचीं ने तुम पे अहल-ए-चमन

ये तुम ने आग गुलिस्ताँ को क्यूँ लगा दी है