Bakhsh Layalpuri's Photo'

बख़्श लाइलपूरी

1934 - 2002 | लंदन, यूनाइटेड किंगडम

प्रगतिवादी विचारधारा के आवामी शायर, ब्रिटेन के प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष रहे

प्रगतिवादी विचारधारा के आवामी शायर, ब्रिटेन के प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष रहे

बख़्श लाइलपूरी के शेर

हमारे ख़्वाब चोरी हो गए हैं

हमें रातों को नींद आती नहीं है

कोई शय दिल को बहलाती नहीं है

परेशानी की रुत जाती नहीं है

कभी आँखों पे कभी सर पे बिठाए रखना

ज़िंदगी तल्ख़ सही दिल से लगाए रखना

दर्द-ए-हिजरत के सताए हुए लोगों को कहीं

साया-ए-दर भी नज़र आए तो घर लगता है

वही पत्थर लगा है मेरे सर पर

अज़ल से जिस को सज्दे कर रहा हूँ

घर भी वीराना लगे ताज़ा हवाओं के बग़ैर

बाद-ए-ख़ुश-रंग चले दश्त भी घर लगता है

अहल-ए-ज़र ने देख कर कम-ज़रफ़ी-ए-अहल-ए-क़लम

हिर्स-ए-ज़र के हर तराज़ू में सुख़न-वर रख दिए

हुसूल-ए-मंज़िल-ए-जाँ का हुनर नहीं आया

वो रौशनी थी कि कुछ भी नज़र नहीं आया

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए