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हबीब अशअर देहलवी

1919 - 1971 | दिल्ली, भारत

सब्र दिल कि ये हालत नहीं देखी जाती

ठहर दर्द कि अब ज़ब्त का यारा रहा

यूँ तो अब भी है वही रंज वही महरूमी

वो जो इक तेरी तरफ़ से था इशारा रहा