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हीरा लाल फ़लक देहलवी

दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 17

शेर 22

देखूँगा किस क़दर तिरी रहमत में जोश है

परवरदिगार मुझ को गुनाहों का होश है

i will see to what extent your mercy is sublime

my lord I am aware of the nature of my crime

i will see to what extent your mercy is sublime

my lord I am aware of the nature of my crime

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तन को मिट्टी नफ़स को हवा ले गई

मौत को क्या मिला मौत क्या ले गई

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मिल के सब अम्न-ओ-चैन से रहिए

लानतें भेजिए फ़सादों पर

ई-पुस्तक 3

Harf-o-Sada

 

1982

 

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