aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Jagat Mohan Lal Ravan's Photo'

जगत मोहन लाल रवाँ

1889 - 1934 | लखनऊ, भारत

रुबाई के मशहूर शायर, गौतम बुद्ध पर नज़्म के लिए प्रख्यात

रुबाई के मशहूर शायर, गौतम बुद्ध पर नज़्म के लिए प्रख्यात

जगत मोहन लाल रवाँ का परिचय

उपनाम : 'रवाँ'

मूल नाम : चौधरी जगत मोहन लाल

जन्म : 14 Jan 1889 | सीतापुर, उत्तर प्रदेश

निधन : 26 Sep 1934

संबंधी : अज़ीज़ लखनवी (गुरु)

LCCN :n88015566

आएँ पसंद क्या उसे दुनिया की राहतें

जो लज़्ज़त-आश्ना-ए-सितम-हा-ए-नाज़ था

जगत मोहनलाल रवाँ की शायरी ने उर्दू की शे’री परम्परा में वैचारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व आलेख को आम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी नज़्में और रुबाईयाँ एक बहुत समृद्ध वैचारिक वर्णंन लिये हुए हैं.
रवां की पैदाइश 14 जनवरी 1889 को मोरानों ज़िला सीतापूर में हुई. उनके पिता गंगा प्रसाद का देहांत उनके बचपन में ही हो गया था. पिता के देहांत के बाद उनकी परवरिश बड़े भाई मुंशी कन्हैयालाल ने की. रवाँ बहुत कुशाग्रबुद्धि के छात्र थे. एल.एल.बी. की सनद हासिल की और वकालत के पेशे से सम्बद्ध हो गये. रवाँ की तबियत बचपन ही से शायरी की ओर उन्मुख थी, अज़ीज़ लखनवी से अपने कलाम की त्रुटियों को ठीक कराया .रवाँ की नज़्मों ,ग़ज़लों और रुबाईयों का संग्रह ‘रूहे रवाँ’ के नाम से प्रकाशित हुआ.
24 सितम्बर 1934 को रवाँ का देहांत हुआ.


 

Recitation

Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

GET YOUR PASS
बोलिए