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कमाल जाफ़री

1949 | दिल्ली, भारत

हमेशा आप को समझा कि आप अपने हैं

हमेशा आप ने समझा कि दूसरे हैं हम

बिखरा बिखरा हूँ एक मुद्दत से

रफ़्ता रफ़्ता सँवर रहा हूँ मैं

ज़लज़ला नेपाल में आया कि हिन्दोस्तान में

ज़लज़ले के नाम से थर्रा उठा सारा जहाँ

क़रीब रह कि भी तू मुझ से दूर दूर रहा

ये और बात कि बरसों से तेरे पास हूँ मैं