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पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

किश्वर नाहीद के शेर

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कुछ दिन तो मलाल उस का हक़ था

बिछड़ा तो ख़याल उस का हक़ था

दिल को भी ग़म का सलीक़ा था पहले पहले

उस को भी भूलना अच्छा लगा पहले पहले

हमें देखो हमारे पास बैठो हम से कुछ सीखो

हमीं ने प्यार माँगा था हमीं ने दाग़ पाए हैं

दिल में है मुलाक़ात की ख़्वाहिश की दबी आग

मेहंदी लगे हाथों को छुपा कर कहाँ रक्खूँ

जवान गेहूँ के खेतों को देख कर रो दें

वो लड़कियाँ कि जिन्हें भूल बैठीं माएँ भी

अपनी बे-चेहरगी छुपाने को

आईने को इधर उधर रक्खा

हमें अज़ीज़ हैं इन बस्तियों की दीवारें

कि जिन के साए भी दीवार बनते जाते थे

कौन जाने कि उड़ती हुई धूप भी

किस तरफ़ कौन सी मंज़िलों में गई

तअल्लुक़ात के तावीज़ भी गले में नहीं

मलाल देखने आया है रास्ता कैसे

कुछ यूँ ही ज़र्द ज़र्द सी 'नाहीद' आज थी

कुछ ओढ़नी का रंग भी खिलता हुआ था

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

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