Muzaffar Warsi's Photo'

मुज़फ़्फ़र वारसी

1933 - 2011 | लाहौर, पाकिस्तान

485
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

ज़िंदगी तुझ से हर इक साँस पे समझौता करूँ

शौक़ जीने का है मुझ को मगर इतना भी नहीं

हर शख़्स पर किया करो इतना ए'तिमाद

हर साया-दार शय को शजर मत कहा करो

लिया जो उस की निगाहों ने जाएज़ा मेरा

तो टूट टूट गया ख़ुद से राब्ता मेरा

कुछ कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न

ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है

पहले रग रग से मिरी ख़ून निचोड़ा उस ने

अब ये कहता है कि रंगत ही मिरी पीली है

मैं अपने घर में हूँ घर से गए हुओं की तरह

मिरे ही सामने होता है तज़्किरा मेरा

जभी तो उम्र से अपनी ज़ियादा लगता हूँ

बड़ा है मुझ से कई साल तजरबा मेरा

तू चले साथ तो आहट भी आए अपनी

दरमियाँ हम भी हों यूँ तुझे तन्हा चाहें

when you walk with me the echo, of my steps should not intrude

I too should not be the between us, I want you in such solitude

when you walk with me the echo, of my steps should not intrude

I too should not be the between us, I want you in such solitude

वा'दा मुआवज़े का करता अगर ख़ुदा

ख़ैरात भी सख़ी से मिलती फ़क़ीर को

मुझे ख़ुद अपनी तलब का नहीं है अंदाज़ा

ये काएनात भी थोड़ी है मेरे कासे में

ख़ुद मिरी आँखों से ओझल मेरी हस्ती हो गई

आईना तो साफ़ है तस्वीर धुँदली हो गई

डुबोने वालों को शर्मिंदा कर चुका हूँगा

मैं डूब कर ही सही पार उतर चुका हूँगा

साँस लेता हूँ कि पत-झड़ सी लगी है मुझ में

वक़्त से टूट रहे हैं मिरे बँधन जैसे

ज़ख़्म-ए-तन्हाई में ख़ुशबू-ए-हिना किस की थी

साया दीवार पे मेरा था सदा किस की थी