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नासिर काज़मी

1923 - 1972 | लाहौर, पाकिस्तान

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में से एक। भारत के शहर अंबाला में पैदा हुए और पाकिस्तान चले गए जहाँ बटवारे के दुख दर्द उनकी शायरी का केंद्रीय विषय बन गए।

आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के संस्थापकों में से एक। भारत के शहर अंबाला में पैदा हुए और पाकिस्तान चले गए जहाँ बटवारे के दुख दर्द उनकी शायरी का केंद्रीय विषय बन गए।

कपड़े बदल कर बाल बना कर कहाँ चले हो किस के लिए

कौन अच्छा है इस ज़माने में

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा

'नासिर' क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है

दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया

दिल में इक लहर सी उठी है अभी

ज़रा सी बात सही तेरा याद आ जाना

ज़रा सी बात सही तेरा याद आ जाना