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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
आज सितारे आँगन में हैं उन को रुख़्सत मत करना

क़मर जमील

ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है

क़मर जमील

शाम अजीब शाम थी जिस में कोई उफ़क़ न था

क़मर जमील

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • आज सितारे आँगन में हैं उन को रुख़्सत मत करना

    आज सितारे आँगन में हैं उन को रुख़्सत मत करना क़मर जमील

  • ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है

    ख़्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उस का दिखाना मुश्किल है क़मर जमील

  • शाम अजीब शाम थी जिस में कोई उफ़क़ न था

    शाम अजीब शाम थी जिस में कोई उफ़क़ न था क़मर जमील