Qasim Yaqub's Photo'

क़ासिम याक़ूब

1978 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

ये झाँक लेती है अंदर से आरज़ू-ख़ाना

हवा का क़द मिरी दीवार से ज़ियादा है

ये क्या कि बैठा है दरिया किनार-ए-दरिया पर

मैं आज बहता हुआ जा रहा हूँ पानी में

क्या हो सके हिसाब कि जब आगही कहे

अब तक तो राएगानी में सारा सफ़र किया

दर-ए-इम्कान की दस्तक मुझे भेजी गई है

मेरी क़िस्मत में तो मौजूद की दौलत नहीं है

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