Saleem Figar's Photo'

सलीम फ़िगार

1972 | यूनाइटेड किंगडम

ग़ज़ल 11

नज़्म 4

 

शेर 5

अँधेरे को निगलता जा रहा हूँ

दिया हूँ और जलता जा रहा हूँ

शाख़-दर-शाख़ तिरी याद की हरियाली है

हम ने शादाब बहुत दिल का शजर रक्खा है

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कहीं आँखें कहीं बाज़ू कहीं से सर निकल आए

अँधेरा फैलते ही हर तरफ़ से डर निकल आए

ई-पुस्तक 1

सितारा सी कोई शाम

 

2015

 

वीडियो 4

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Saleem Figar in London in 2011

सलीम फ़िगार

Saleem Figar reading his poetry

सलीम फ़िगार

ye dua hai aane waale saal ka suuraj

सलीम फ़िगार

सलीम फ़िगार