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शाह दीन हुमायूँ

1868 - 1918

शाह दीन हुमायूँ के शेर

तन्हा उठा लूँ मैं भी ज़रा लुत्फ़-ए-गुमरही

रहनुमा मुझे मिरी क़िस्मत पे छोड़ दे