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शौक़ बहराइची

1884 - 1964 | बहराइच, भारत

अग्रणी हास्य/व्यंग शायरों में विख्यात।

अग्रणी हास्य/व्यंग शायरों में विख्यात।

बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था

हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा

हर मुल्क इस के आगे झुकता है एहतिरामन

हर मुल्क का है फ़ादर हिन्दोस्ताँ हमारा