Waseem Barelvi's Photo'

वसीम बरेलवी

1940 | बरेली, भारत

लोकप्रिय शायर।

लोकप्रिय शायर।

मुझे पढ़ता कोई तो कैसे पढ़ता

अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा

मोहब्बत में बिछड़ने का हुनर सब को नहीं आता

न पाने से किसी के है न कुछ खोने से मतलब है

अपनी इस आदत पे ही इक रोज़ मारे जाएँगे

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी

आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है

आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है

आज पी लेने दे जी लेने दे मुझ को साक़ी