Yasmeen Hameed's Photo'

यासमीन हमीद

1951 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 14

नज़्म 7

शेर 19

ख़ुशी के दौर तो मेहमाँ थे आते जाते रहे

उदासी थी कि हमेशा हमारे घर में रही

पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी

हमें दुनिया नज़र आने में बहुत देर लगी

हमें ख़बर थी बचाने का उस में यारा नहीं

सो हम भी डूब गए और उसे पुकारा नहीं

पुस्तकें 5

Dusri Zindagi

 

2007

Hisar Be Dar-o-Deewar

 

1991

Buniyad

Noon Meem Rashid Number: Shumara Number-001

2010

Buniyad

Volume-007

2014

 

वीडियो 4

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
At a mushaira

यासमीन हमीद

Hum ye bhool jaate hain

यासमीन हमीद

Reciting own poetry

यासमीन हमीद

Reciting own poetry

यासमीन हमीद

ऑडियो 5

इतने आसूदा किनारे नहीं अच्छे लगते

उफ़ुक़ तक मेरा सहरा खिल रहा है

पर्दा आँखों से हटाने में बहुत देर लगी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI