Zahid Fakhri's Photo'

ज़ाहिद फख़री

1954 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 2

 

शेर 2

उठाना ख़ुद ही पड़ता है थका टूटा बदन 'फ़ख़री'

कि जब तक साँस चलती है कोई कंधा नहीं देता

रात है सर पर कोई सूरज नहीं

किस लिए फिर साएबानों में रहूँ