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ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

1817 | दिल्ली, भारत

अहम क्लासिकी शायर, ग़ालिब की बीवी के भांजे, जिन्हें ग़ालिब ने अपने सात बच्चों के असमय निधन के बाद बेटा बना लिया था. ग़ालिब आरिफ़ की शायरी के प्रशंसकों में भी शामिल थे

अहम क्लासिकी शायर, ग़ालिब की बीवी के भांजे, जिन्हें ग़ालिब ने अपने सात बच्चों के असमय निधन के बाद बेटा बना लिया था. ग़ालिब आरिफ़ की शायरी के प्रशंसकों में भी शामिल थे

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़ के परिचय

आप को ख़ून के आँसू ही रुलाना होगा

हाल-ए-दिल कहने को हम अपना अगर बैठ गए

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